मित्रता की डोर

तुम मेरे साथ खड़े रहे जब सब छोड़ गए
हर दुख में, हर खुशी में, मुझको थाम लिए

कभी न पूछा कमजोरी, कभी न डाँटा मुझको
बस प्यार से समझाया, सहारा दिया मुझको

जैसे पतंग में डोर, वैसी है यह मित्रता
एक दूजे को बाँधे, बिना किसी स्वार्थ की बंधता