मित्रता की गलियों में

हर दिन नयी सहर होती है,
मित्रता की गलियों में।
हर खुशी में बाँट लेते हैं,
हर दुःख में साथ देने चले आते हैं।

वो चाय की उन प्यालियों में छुपा प्यार,
वो बारिशों में साथ भीगने की तैयारी।
कभी उलझनों में ढाल,
तो कभी खुशियों का उजाला।

अनकहे शब्दों को भी वो पढ़ लेते हैं,
उन आँखों की बातें जो कहीं नहीं की जातीं।
मित्र वो नहीं जो हमेशा साथ चलें,
मित्र वे हैं जो अंधेरों में भी, लौ बनकर जलें।

तो आओ, इस मित्रता को संजोएं,
क्योंकि यही तो वो बंधन है जो बिना किसी शर्त के साथ होता है।
हर उस मोड़ पर, जहाँ जिंदगी सिखाए,
मित्रता की गलियों में ही सच्चा प्यार पलता है।