मित्रता की मीठी छांव

मित्रता की मीठी छांव में,
सुख-दुख के फूल खिलते हैं।
साथ चलते कठिन राहों पे,
हाथ थामे, मन मिलते हैं।

जब नज़रें बोल उठती हैं,
शब्दों की कमी नहीं होती।
मन की गहराइयों से,
सच्ची मित्रता रोज़ खिलती।

दूरियाँ हों या पास हों,
दिल के तार जुड़े रहते हैं।
मित्रता की मीठी छांव में,
जीवन के सपने सजते हैं।