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मन करता है

मन करता है पंख लगाकर,
नीलगगन में उड़ जाऊँ!
मन करता है रेलगाड़ी बनकर,
छुकछुक करते सरपट पटरी पर दौड़ लगाऊँ!
मन करता है नेता बनकर,
जन के अधरों पे खुशी लाऊँ!
मन करता है हीरो बनकर,
सारे गुंडों खुब पीटूं!
मन करता है अन्न बनकर,
निर्धन-भूखे को पेट भरूं!
मन करता है पानी बनकर,
प्यासे को प्यास बुझाऊँ!
मन करता है बिल्ली बनकर,
'म्याऊ-म्याऊँ' बच्चों को गीत सुनाऊँ!
मन करता है मोबाईल बनकर,
सारे देशवासियों को मीठी-मीठी बातकराऊँ!
--------- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
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