मिला है जब जन्म मुझे इस धरा पर
लेकर उतरेंगे पग हम इस धरा पर
कर जायेंगे ज्ञान से सबको सिंचित
देखने वाले देखते रह जाएंगे
जो है इस अनमोल कविता से वंचित-२
मत हो उदास इन पंक्तियों से
अभी तो बस इतना ही है लिखित
लेकिन जब निकलेंगी इस अवरूद्ध कंठ से
कर देगी वह सबको कवलित-२
निकल पड़े जिस डगर पर हम
पिछे धूल उड़ती चलीं
जिस पथ को हम छोड़ चलें
उस पथ को वह अपना चलीं -२
हम राही है राह हमारी
डग मग चलती पग हमारी
निकलें जिसके ख़ोज में हम
उस मार्ग को दिखलाती चलीं-२
"अमन कनौजिया"
(जे.न.वि)
©Pawan Kuma
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