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मुझे कुछ कहना है...

कटघरे मे खड़ी
मै तो एक नारी हूं
खुद के गुनाह को, बेगुनाह मे बदलने वाली
मे तो एक शक्ति की अवतारी हूं.......
मेरे ज़मीर की आवाज को दर्ज करने को,
इन पापियों के पाप को
नष्ट करने वाली मे तो एक ज्वाला हूं...
मौका मिले उस गीता पे हाथ रखने का......
मौका मिले उस गीता पे हाथ रखने का....
उन सच्चाईओं की बुनियाद पे
मेरी दर्द भरी आवाज से
मे यही कहूँगी,
"मुझे कुछ कहना है"
"मुझे कुछ कहना है"
- Durga(Diya)
©diyadeepak