P

मुखालिफ

सपनों को पाने का फितूर हैं हममें,
रोशनी तो इतनी है मानो आफताब हो ।
कुछ बड़ा करने की मुराद है ,
फरोग की तरह चाह है ।
कोई मुकाम हासिल करना है ,
कमर के समान चमकना है ।
सियासत से महरूम है
पर तमनायों पर अकीडा है ।
तख्खायुल बनाने वाले ,
हारोफ से मानूस होते ही ।
अपने वजूद का इतफाद समझ लेते हैं ,
नायब इनायत को तकबूर समझते है ।
अपने मुखालिफ से वाकिफ है ,
पर तलबगार हैं परवाज के लिए ।
अपनी अपना के आगे मशीखत मायने वही रखे जाते हैं ।
मुनासिब से मुलजिम बना देती ।
©priydarshi