V

मुक्तक

कश्ती को पानी में चलाए रखना।
जबतक फ़ैसला न हो जाए उम्मीद बनाए रखना।
शिक़स्त का ख़्याल गलती से भी न आने देंना
दिया जीत का अंत तक जलाए रखना।
वि के विराज़
©v.k.viraz