मुस्कुराता तो मै पहले भी था
ये अंदाज नया नहीं है
ये साया आत्मसंतुष्टि की है,
दिखावे पेड़ की छाया नहीं है।
ये मुस्कान कुछ अलग है
हर खुशी चेहरे पर मुस्कान नहीं लाती।
कुछ खामोश और आशु दे जाती है,
बादल तो बरसते है
लेकिन हर बादल अश्क पर सावन नहीं लाती।
©Nilesh K
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