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चूप चूप सी रहती हूं,
अपने आप मै खोई रहती हूँ,
मन ही मन बाते करती हूँ,
ख्यालों के प्याले मे डूबी रहती हूं,
अजीब कश्मकश मै उलझी रहती हूं,
वक़्त की रफतार के साथ भागी फिरती हूं,
चेहरे के दर्द को छुपाए रखती हूं,
मै अंदर ही अंदर टूटती रहती हूं,
जिंदगी की उलझनों को सुलझाते रहती हूं,
मै अपने आप को फ़िर से समेट ती रहती हूं....
©dhani