नागरिकता की आड़ में करते हो धरने और प्रदर्शन
सरासर बगावत है तेरी ये कोई राष्ट्रवाद थोड़ी है।
समनदर में रहकर सिखा है जो घड़ियाल से बैर करना
औकात में रहो ये कोई कांग्रेसियों का संविधान थोड़ी है ।
खुद को जो समझ बैठे हो बाबर व अबदाली का वंशज
अपना खुन पता नहीं जाहिल हो, तुम में ईमान थोड़ी है ।
बेशरम,बेगैरत बेवजह अफवाहों को हवा दे रहे हो
हम फकत चुप है अभी,तेरी तरह नामर्द इंशान थोड़ी है।
महफूज़ है जगह यहाँ भी जहाँ है तालिम-ए-दहशतगर्द
निगांह में है हमारे सभी,हम उससे अंजान थोड़ी है।
समेट लो सभी ठिकाने मोहलत कुछ दिनों की ही बाकी है
ये कैब है भाई जान, कोई कम्प्यूटर या टैब थोड़ी है।
सिफारिशें किस से कब तक कहाँ करते अब फिरोगे
तैयार है माप गले के तेरे,ये सच है मजाक थोड़ी है।
महफिलों मुशायरों में नारे जो पढते और पढाते हो
सरजमीं मेरी है सच है,तेरे बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है।
©anuragrahi
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