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“नाम तेरा, साँस मेरी”❤️✨

“नाम तेरा, साँस मेरी”❤️✨
तेरे नाम कि आदत कुछ यूँ लगी की
पुरी दुनिया अब बैगनी लगती है ।
तुम मुझे कभी छोड़कर ना जाना ।
मुझे तुमसे कोई शिकवा नही , ना कोई गिला है।
तेरे होने से अंधेरी राते भी सुहानी लगती है ।
तेरे ना होने से सूर्य कि किरणे भी बैगनी लगती है।
हम काली रातों में जब सोते है तब भी तुम्हारा नाम रटते है ,
और सूर्य के प्रथम अंशु के साथ उठते है तब भी तुम्हारा नाम रटते है ।
तेरे ना होने से हम तन्हाई में खो जाते है ।
तेरे ना होने से ये महफिल भी सुनी लगती है ।
फिराक इतना गहरा है कि हँसी भी रोने लगी ।
ना लिखा हो अगर मेरी हाथों कि लकीरो में तेरा नाम तो तु तकदीर बनकर आना ।
मै नदी -सी मिलूंगी तुम्हे ,
तुम बांध बनकर मुझे संभालना ।
ना खुशियों कि चाह है , ना महंगे नज़राने की
मुझे तो जरूरत है तेरे साथ की।🥺