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नारी ने पकड़ी रफ्तार

दिल में इश्के प्यार बंधन में है सिंगार है समेट के सब कुछ नारी ने पकड़ी रफ्तार है रफ्तार है यह विकास की जो संवारे की फ्यूचर हमेशा परिवार के बारे में सोचना रहा है इसका नेचर यह दुर्गा है यह है लक्ष्मी यह अब सरस्वती का स्वरूप बनी जरूरत में पति के लिए तो कभी यह धूप बनी कोमल की काया है पर दिल में इसके अपार साहस भरा इसकी जितनी बनवा दिया पुरुषों से अपना लोहा तो अब ना रहेगी नारी किसी से मैदान में पीछे ठोकी है ताल अब जो बरसों से सीकर पहले लाएगी नीचे नारी के विकास से जुड़ा है समाज और संसार का विकास बढ़ाकर नारी को आगे देश को रोशन करने का प्रयास नारी अब तू विकास की मिसाल है इस संसार में बस उलझ के ना रहना तू अपने घर संसार में
©swami