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नहीं हूं मैं अब

नहीं हूं मैं अब
मान ले तू अब
मत आ कब्र में मेरे तू अब
हक है खुश रह तू अब
मां के लिए शहीदी दी
सफेद रंग ओढ़ने के लिए नहीं
सुर्ख रंगदार मैं देखा तुझे
तो अब क्यों नहीं
हा दर्द है तुझे
जाने का मेरे
पर खुश तो है ना
धरती मां को बचाया मैंने मेरी
ओढ़ले सुर्ख रंग फिरसे
खुश रह जिंदगी में फिर से
यादें बना फिर से
आजाद कर मुझे अपने से
शहीद में हुआ
सहना तुझे पड़ा
सुर्ख से सफेदी ओढ़नी तुझे पड़ी
सूना तुझे होना पडा
अब मत पूछ
घर कब आऊंगा मैं
घर कब आऊंगा मैं
©richa06