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__निहार__

ये कोई इत्तेफाक़,
या किसी की गुज़ारिश तो नहीं।
आप की मुस्कान पे फना हुए हम,
ये मोहब्बत का पैग़ाम,
या खुदा की ख्वाहिश तो नहीं।।
©nihar