नन्हे क़दमों में दूरियां बहुत है
जब मां का हाथ सिर पर है
तो लक्ष्य भी बहुत निकट है
लहू के पथ को पार करना
जैसे हौसलों की उड़ान भरना
नन्हे कदमों में कांटो का
चुभना वीर दिल चीरता है
खामोशियां कुछ ना कहें
मंजर बयां करता है दास्तान
©lawnishtha
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