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नफ़रत की आग लगी है

नफ़रत की आग लगी है दिल में
पर चाय तो सकून से पी लीजिए
वरना कौन जाने जिंदगी की पतलून कब ढ़ीली हो जाए
कुछ पल हंसी के दीजिए वरना कौन जाने आपकी किस्मत आपको किधर ले जाए
©BAL GOPAL