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नफरत नफरत क्यों है कोई जवाब नहीं तेरे मेरे सवाल के

रोशनी की तलाश में निकल कौन कहां पड़ता है हमसफ़र
कुछ लोग घी का दिया जलाते हैं तो केरोसिन, बिजली से
मंदिर मस्जिद गिरजाघर और निराले गुरुद्वारे सब तलाश है
पंडित मौलवी पादरी और निराले ग्रंथ साहिब सब तलाश है
कोई भूखे को खाना देता तो कोई दुआओं का पुलिंदा देता
हर कोई तलाश रहा मानव को मानव में इंसानियत कहां है
नफरत हिंद की इतनी बदल गई अब तो नफरत कपड़ों से
जिनकी पुरखों की जमीन मिट गई नफरतें फैलाने से देश
चारदीवारी और तालों में बंद है ईश्वर तो इंसानियत कहां है
शिवाय नफरत के कुछ बातें हैं जहन में उठती नहीं है आज
जिस ईश्वर की तलाश में तुम निकल पड़ते,प्राकृतिक स्त्रोत
कभी तुम खोजना खुशी को अपने जहन में कोयल की कू
हर कोई नफरत कहलाता आपस में सिर्फ इंसानियत नहीं
कभी जाति के नाम पर कभी धर्म के नाम पर कभी राज्य
क्या मिल जाता है नफरत फैलाने से देश की आवाम को
आज आवाम जिंदा है तो नफरत से मिट जाति नस्ल दंगों
कभी तुम जहन में सवाल उठाना कि नफरत क्यों है देश में
बुद्ध की भूमि है तर्पण की भूमि है धम्मम शरणम गच्छामि
कभी सवाल उठे तो जवाब भी बुद्ध की खोज से मिलता है
शांति की खोज कहां कब किसको मिली यह खुद जानने है
नफरत नफरत क्यों है कोई जवाब नहीं तेरे मेरे सवालों के
तुम खोज शांति की गणना नफरत अपने आप मिट जाएगी
अंतर्मन में द्वंद इतना है कि सवाल उठते हैं जवाब नहीं मेरे
आखिर कब तक है इतना दोनों सवालों में उलझने का तेरे
खोज खबर नहीं रिश्तो की सिर्फ नफरत की आंधियों से
कभी वह शाम आएगी जब नफरत मिट जाएगी शहर की
©lawnishtha