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नव वर्ष

मन के जालों को हटाकर
कर देना है एकदम साफ़
त्रुटि के लिए क्षमा मांगकर
करना भी है दिल से माफ
छोटी बातों में ढूंढे खुशियाँ
हर ग़म को जड़ से भूलाकर
उपलब्धि पाने की खुशियों को
बाँटें दोस्त, यारों को बुलाकर
हमारी बातों और कृत्यों से
नही दुःखे किसी का मन
करना है अब ऐसे काम
रहें स्वजन और मित्र प्रसन्न
समय कीमती और बलवान
इसे यूँ ही नही है गँवाना
सदा ख़ुद भी हँसते रहना
साथ औरों को भी हंसाना
कुतर्क, अनर्गल, विवादों से
हमें रखना है निश्चित दूरी
सफलता मिले या ना मिले
कोशिश करते रहना है पूरी
देश, फ़र्ज़,परिवार और दोस्ती
सामंजस्य सभी मे है रखना
एक-दूजे की करके मदद
जीत का स्वाद मिलकर चखना
कोई हो तकलीफ़ या मुसिबत
अकेले नही है घुटते रहना
प्रियतम से साझा करलो बात
कौन जाने कब किसे बिछड़ना
परस्पर करना है प्यार-आदर
खटास, रंजिश भूलकर पुरानी
प्रेम रतन ही असली धन
छोटी सी है ये ज़िन्दगानी
चाहे कितने भी व्यस्त हों हम
शौक को ज़िंदा हमे है रखना
कौन है अपना कौन पराया
इसको गहनता से है परखना
वैसे तो हर दिन को मानो
अपने आप मे एक नया साल
होगा उद्धार और भला हमारा
बैर-द्वेष तो मन से निकाल
काम वही करना है जिससे
अपने मन को संतुष्टि मिले
बीज भलाई के ऐसे बोना
गुलशन में महकते फूल खिले
जितना जिसको भी मिला है
प्रभु को करें उसका धन्यवाद
वंचित हैं इनसे भी लाखों
हम तो फिर भी हैं आबाद
नव वर्ष के आगमन पर
आओ मस्ती में झूमें, गाऐं
सहज सहृदय से सभी को
पास जाकर गले लगाएँ
नए साल में नई पहल हो
उलझी ज़िन्दगी और सरल हो
अब तक रही जो अबूझ पहेली
काश कि उसका भी हल हो
ग़म की परछाइयां रहे दूर
सामना नही हो तन्हाई से
अरमान, ख़्वाब हों पूरे आपके
दुआ है ये दिल की गहराईयों से
............. पंकज जैन, भोपाल
🙏💐👍🤝🎂🇨🇮
©pankajjain