कलयुग के इस दौर में क्या जमाना आया, कोई भी दिवस आये हम दिमाग को छोड़ यूट्यूब, गुगल पर क्यो जाऐ, हाथ दिया भगवान ने क्यो ना इसे हि चलाऐ, आज शिक्षक दिवस पर कविता कविता खुद बनाऐ दौर आज का तो कविता भी आज की ; एक दौर था जब कृष्ण अर्जुन ओफलाइन थे पर आज हर गुरु- चेला ओनलाइन है क्योंकि दौर आज का॥ हे गुरुवर! यह कैसी विडम्बना हम थक चुके है ओनलाइन से अब हमे भी ओफलाइन आना है | एक दौर था जब भगवान हमे दुनिया के भवसागर से पार कराते थे , निवेदन हम करते गुरु से कि इस ओनलाइन दौर में सरकारी नौकरियों में हमे भी भवसागर पार करा देना॥
©Gomati Kum
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