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ओस की बूंदें

ओस की बूंदें
वो भीगी मुलायम पलकों
से छलकते आँसु
वो शरमीली पत्तीयो
पर चमकती ओस की बूंदें
मेरा आज भी मन मोह लेती हैं
खाए है मोहब्बत में जख्म
जैसै बया ये तेरी पलकें करती है
बिछडन अपने प्रेमी की
बयां ये पेड़ करते हैं
छलकते इनके ये आँसु
ओस की बूंदें बन जाते हैं
ना काटों इनको ,ना अलग
ये प्रेमी होगे
ये छलके आँसु
एक दिन ओस की बूंदों में
चमकते मोती होगे
रख शबर तु उस खुदा पर
एक दिन ये पेड़
भी खुश होगे
बन कर ओस की बूंदें
गहना इनका चमक उठेगी
उस दिन दो प्रेमी जोड़े
मिल चुके होगे
@chandnibhatnagar527
©Chandni
©chand1305