पूछते है लोग मुझे
बदल गई कैसे? ये राज बताओ
गुमनामियों के अंधेरों में रहने वाली
डरी डरी सहमी सहमी चुपचाप कोने में छुपने वाली
कैसे अचानक थिरकने लगी
कैसे सिर उठा बिना डरे जीने लगी
कहां से मूक शब्दो को मिली आवाज
कहां से आया ये अंदाज
कैसे ये बदलाव आया
जादुई चिराग लगा हाथ या कोई जिन्न आया
कहीं से खुश रहने का पासवर्ड चुराया
या सफलता का दरवाजा खोलने का कूटशब्द
कहीं से पाया
कैसे बताऊं आपको, कोई नही है ये राज
ना किसी ने दिया कोई गुप्तशब्द,
ना ही चुराया कोई password
बस खुद की मेहनत से अपने आप को पाया
दूसरो को कर नजरंदाज अपना आत्मबल बढ़ाया
किसी की तीखे शब्द तन को झिंझोड़ गए
वचनों के तीखे शूल दिल को घायल कर गए
हर जख्म में से आई आवाज,
उठ जगा अपना आत्मविश्वास
अपनी लेखनी को बना अपनी तलवार
चीर डाल उन्हे, जिन्होंने किया तेरे अहम पर वार
किया खुद से एक संकल्प
कुछ कर दिखाऊंगी अपने दम पर
कठिन थी फर्श से अर्श तक पहुंचने की डगर
हजारों बाधाएं खड़ी थी सीना तान कर
अपने मनोबल को सशक्त कर,
आत्मविश्वास को बना अपना हमसफर,
आ पहुंची हूं यहां तक
कहना चाहती हूं सबसे
सफलता का गुप्त शब्द कोई दे सकता नही
खुश रहने का पासवर्ड किसी किताब या कंप्यूटर विशेषज्ञ के पास मिलेगा नही
स्वयं पर रख विश्वास , हौसलो को दे नई उड़ान
बनानी पड़ती है खुद की पहचान
अपने स्वाभिमान को रख कायम
ढूंढना पड़ता है खुद को खुद के अंदर
गर छुने हो नए आयाम।
©awakening
A