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फिर से बच्चा होना है मुझे

1)ये जो इतनी बुराइयां आ गई हैं मुझमें,,,
इन सब से निकल के फिर से अच्छा होना है मुझे,
ये समझदारी के दिन रास नहीं आते
लौटा दो मेरा बचपन फिर से बच्चा होना है मुझे।।
2)जिंदगी की मसरूफियत से, रातों की वैचेनी से,
लोगो की सलाह से , अपनो से पराए से,
दुनिया की निरंतरता से थक गया हूं मैं,
मां के आंचल में छुपकर फिर से रोना है मुझे।
ये खुदगर्ज लोग रास नहीं आते ,
लौटा दो मेरा बचपन फिर से बच्चा होना है मुझे।।
3)न खाने की चिंता थी, न कमाने की ख्वाहिश थी,
बस कुछ खिलौनों की चाहत थी और पापा से आजमाइश थी।
न पढ़ाई का दाब था, न नौकरी का ख्वाब था।
मेरे पापा राजा तो नही पर में उनका नवाब था।
मां की गोद में सर रखकर फिर से सोना है मुझे
ये जवानी के दिन रास नहीं आते ,
लौटा दो मेरा बचपन फिर से बच्चा होना है मुझे।।
4)ये बचपन के बाद की जिंदगी बड़ी परेशान सी है
सुबह नाराज़, दिन अनजान, शाम बेईमान सी है।
इस काम की चिंता ने कितना असर किया है मुझपे
जिंदगी के इस सफर में खुद से आगे होना है।।
दिन भर का थका हूं फिर भी ज्यादा नहीं सोना है मुझे
।।
ये तंग सी जिंदगी अब रास नहीं आती
लौटा दो मेरा बचपन फिर से बच्चा होना है मुझे।।
- सोहिल शेख
©sohilshekh