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❤️फितुर❤️

एक नुर का कसुर है,ये कैसा दस्तूर है,फलक पर चांद कि चमक है,दिल पर इक नशे का फितुर है।
वो निगाहों कि चमक बेशुमार,छलकते जाम से लबों का सुरुर है।
निगाहें चुराकर मुझे देखना,शरारत भरे इशारों से,अब तो क़त्ल भी मंजूर है।
वो प्यारी सी हंसी,करें दिवाना इस कदर,दिल में मेरे अब तो बस,जज्बातों का बवंडर है।
चैन का भी छिन लिया चैन उसने,मगर चेहरा कितना बेकसुर है।
एक झलक इतनी मासूम सी,बेकाबु मेरा दिल अभी, कातिलाना जा़लिम उसका रंग रुप।
ताज है,शिद्दत से तराशा हुआ,ये चांद मुझसे क्यु इतना दूर है।तीखे नैन नक्श एक ख्वाब है,और होंठ रस से भरे अंगुर है।न जाने बस एक दिदार का,गहरा क्यु इतना असर,वो एकदम बेअसर,और मैं जी चुका एक लंबा सफर।सिर्फ एक रात का रंगीन फितुर,फिर पुरी जिंदगी भर,मैं नशें में चुर चुर,अब कहां दिल को सुकून है।
🥀कवि:- अभय ना.ताकसांडे🥀
©abhayt