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फुर्सत के पल

इस उगती हुई आँधियारी से,
इस महामारी की आरी से......
कट गये लोगो की चहल,
कुचल गये लोगो के पल
बस रह गये है फुर्शत के पल....
बस रह गये है फुर्शत के पल....
समय नहीं था, रिश्तों के लिए,
समय नहीं था, लोगो को अपनों के लिए...
इस महामारी ने सीखा दिया..
जीने का तरीका बदल दिया.....
बस रह गये है फुर्शत के पल....
बस रह गये है फुर्शत के पल....
-Durga(Diya)
©diyadeepak