प्रेम और विरह

प्रेम एक धारा, विरह की तड़प में बहा,
दो दिलों का मेल, फिर भी एक दूजे से जुदा।

जब साथ होते हैं, तो समय थम सा जाता है,
विरह में, हर पल एक युग सा लगता है।

प्रेम की मीठी बातें, विरह की सिसकियाँ,
यही तो है जीवन की असली परीक्षाएँ।

अंतर में बसे, एक-दूजे के ख्वाब,
विरह में भी, प्रेम रखता है उन्हें लाजवाब।

प्रेम का सृजन, विरह की अग्नि में तपकर,
शायद, और भी मजबूत होता है रिश्तों का बंधन।

दो दिल, एक दूजे से दूर होकर भी, कैसे साथ होते हैं,
प्रेम और विरह, जीवन के अद्भुत एहसास होते हैं।