प्रेम बिना ये जीवन क्या जैसे पानी बिन मछली जैसा
प्रेम बिना ये जीवन क्या सूखे से निर्जन वन जैसा
प्रेम बिना ये जीवन क्या आधारहीन बिल्डिंग जैसा
प्रेम बिना ये जीवन क्या जैसे जीते जी मर जाना सा
प्रेम बिना ये जीवन क्या कविता में निरसता आना सा
प्रेम बिना ये जीवन जैसे, जीवन से जीवन वंचित हो
प्रेम बिना इस जीवन में सारे ही दुख का सृजन हो
प्रेम पीयूष को पिया नहीं तो जीवन व्यर्थ बनाया है
प्रेमरहित ही जाना है तो क्यों दुनिया में आया है?
©milanupadh
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