जब मिलते हैं दो दिल, जैसे मिले कोई मेला,
खुशियों का संगीत, चारों ओर उजाला।
पर जब विरह आए, ले कर अपना पहेला,
टूटता है कुछ अंदर, जैसे हो कोई अंधेरा।
प्रेम में रंगीनियाँ, विरह में उदासियाँ,
दोनों हैं जीवन के, अपने-अपने फासले।
प्रेम जीवन को सिखाता, हंसना और खुश रहना,
विरह शिक्षा देता, समझना और सहना।
प्रेम, विरह के बिना पूरा नहीं,
विरह, प्रेम के बिना अर्थहीन।
जीवन की इस यात्रा में, दोनों ही जरूरी,
प्रेम और विरह, जीवन के दो सुरूरी।