विरह की रातें, सुनी गलियों में गूँजती,
प्रेम की मीठी यादें, आंखों के कोनों में बूंदों में बहती।
बने हम दो परछाईयाँ, एक दूजे के साथ,
फिर भी लाखों मीलों की दूरियाँ, इस दिल की बात।
वो प्यार का पहला स्पर्श, जैसे वसंत की पहली बारिश,
विरह का ये गहरा अंधेरा, फिर भी प्रेम की अमर वाणी फरिश्त।
प्रेम और विरह, मिलन और बिछड़न का अनंत चक्र,
जीवन के इस परिपथ पर, बस एक ही सत्य - अधूरा सा यह प्यार।