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प्रेम की होली!

ई होली का त्यौहार कैसा है?
त गुरु अपने मन के जैसा है
ना ना प्रकार के जन हैं,
ना ना प्रकार के मन हैं!
तो बस जैसा जिसका संग वैसा ही उसका रंग...
उजरका, करियवा, ललका ,पियरका...
हरीयरका, गुलाबी,अतरंगी, सतरंगी...
एक कान्हा के प्रेम में,
ना ना प्रकार की गोपियां
कुछ को उसने मोह लिया,
कुछने उसे ही जोह लिया...
जिसने जैसा जाना उसको
वो उस रूप में उसका हो लिया....
कभी गुल्ली डंडा खेलके,
किसीके दही के मटके ठेल के
इंद्र से अकड़कर,
बलदाउ से झगड़कर ,
राधा के प्यार में,
मइया के दुलार में,
गोरू बछरू के साथ में,
नन्द बाबा के हाथ में
जिसने देखी कन्हैया की होली,
वो उसी का हो लिया.....😊
©manmauji