प्रेम की परिभाषा में विरह का एहसास

प्रेम में डूबते जब साँसों में विरह की बारिश होती,
दो दिलों के बीच वो अदृश्य डोरी और मजबूत होती।

कभी खुशियों का जहां, कभी आंसुओं का सागर,
प्रेम और विरह में जीवन की ये विचित्र डगर।

मिलन की चाह में बिताई वो लंबी रातें,
विरह की आग में तपकर बनते प्रेम की बातें।

दो जन होते हैं पर एक हो जाने की आस,
प्रेम में विरह, विरह में प्रेम का अपना एक विश्वास।

क्या जाने दुनिया, इस अनोखे संगम की गहराई,
जहां प्रेम और विरह मिल, जीवन की नई राह बनाई।