प्रेम में डूबें, जब दो हृदय अनूठे,
विरह में भी, उनका प्यार न होता छूटे।
अलगाव की इस घड़ी में, प्रेम और भी गहरा,
यादों की मीठी चाशनी, लगती और भी शहद से महरा।
प्रेम पाठशाला का अतुलनीय सबक,
विरह उसकी कठिन परीक्षा, हर पल एक नया शबक।
ये प्रेम नहीं, तो क्या है,
जब हो साथ नहीं, और मन रोये छिपाए बिना क्या है।
प्रेम और विरह, दोनों संग-साथ चलते,
एक बिना दूजे के, जीवन के मार्ग अधूरे पलते।