प्रेम विरह की गाथा

प्रेम के मधुमास में, जब फूलों ने खिलना शुरू किया,
उनकी खुशबू से हर कोना सजीव हुआ।
दो दिल एक धड़कन में मिले, बिना कहे सब कुछ कहा,
प्रेम अपनी पूर्णता में, हर बाधा पार किया।

पर वक्त की रेत ने, जब अपनी गति बदली,
उन मीठे पलों को विरह ने आ घेरा।
प्रेम में पली-बढ़ी यादें, अब वेदना की आग में तपती,
दिल दर्द में डूबा, ये सोचकर कि शायद प्रेम सच में कभी मरा नहीं।

विरह की इस कड़ी में, दोनों ने सीखा प्रेम की ताकत,
अब हर आंसू में उनके प्रेम की मिठास बहती।
विरह ने सिखाया, प्रेम कभी खोता नहीं,
बस उसके होने का एहसास बदल जाता है।

फिर एक दिन, वे फिर मिले, नए सवेरे की आशा के साथ,
प्रेम और भी गहरा हो गया, विरह की आ