प्रेम विरह की वेदना

प्रेम रंग बिखेरे जहाँ, विरह ले आए सन्नाटा,
दो दिलों का मिलन संगीत, विरह में खोया गाता।

वह प्रेम जो दूरियों में भी, दिलों को करता है नगीन,
उस विरह में ढूँढ़ता है पथिक, उसकी यादों के मीनार।

प्रेम में सजती है दुनिया, विरह में सुना हर कोना,
पर यह विरह ही तो सिखलाता, प्रेम का असीम होना।

जब प्रेम में होता है विरह, तब अहसास होता गहरा,
क्योंकि प्रेम आधा नही, विरह के बिना पूरा नही बसेरा।