बसंत आया, खुशियों का बाजार साथ लाया,
पेड़ों पर नई कोंपलें, फूलों का सागर छाया।
ग्रीष्म की तपिश में, सूर्य आग बरसाए,
प्राणियों की तृष्णा, पानी की एक बूँद में समाए।
वर्षा ऋतु की बूँदें, धरती को नया जीवन देती,
हरियाली से लिपटी, कहानी अनोखी कहती।
शीत ऋतु में, कोहरे की चादर सब पर छाई,
अलाव की गर्मी में, सबने खुशियाँ मनाई।
चार ऋतुएँ, चार अध्याय, प्रकृति के इस खेल में,
जीवन के हर पल को, निखारे जैसे कला के मेल में।