प्रकृति का आंगन

सुबह की पहली किरण में,
प्रकृति ने अपना रूप सजाया।
धरा की हरियाली ने,
मन मोहा, सपने जगाया।

चिड़ियों की चहचहाहट में,
संगीत का सुर छिपा।
नदियों का कलकल,
जीवन का संगीत बना।

पहाड़ों की ऊँचाई पे,
बादलों का खेल निराला।
सूरज की लालिमा में,
खुशियों का पल पला।

हर मौसम की अपनी कहानी,
प्रकृति कि ये सुंदरता पुरानी।
निरंतर बहती जीवन धारा,
प्रकृति का यह विशाल सारा।

संरक्षण है हमारा कर्तव्य,
प्रकृति के इस अनमोल अध्याय का।
हर कण में है जीवन,
प्रकृति है, तो हम हैं आज का।