प्रकृति की छाँव

सूरज की पहली किरण, नदी पर बिखरी सोने सी चमक,
बूंदों में बंद, जैसे नन्हीं जिंदगियों की चहल-पहल।

पेड़ों की हरी चादर, मोर का नाच,
फूलों की महक, भंवरे की गुंजन,
सब, प्रकृति का अद्भुत संगीत।

शहर की हलचल से दूर, यह पल,
प्रकृति की गोद में उतरा शांति का मंत्र।

जब सूरज ढले, और तारे करें रात की पहरेदारी,
किरणों और छाया का यह खेल, प्रकृति की सुंदरता की सारी।