हरी-भरी घाटी में, झरने की थाह
कुछ कहती पलकें, कुछ गाती हवा
पत्तों में छुपी है एक मौन कहानी
पहाड़ों की गोद में खिली हुई ज्ञानी
सूरज की किरणें, चांदनी की चादर
प्रकृति है एक अनमोल, अद्भुत संसार
कभी मौन, कभी गाती, कभी झूमती
हर पल में वो एक नई कविता लिखती