हरी-भरी डगर पर, चाँदनी रात में
झूमते पेड़, गाते पंछी मधुर गीत में
बहती नदी के किनारे, कमल खिले हुए
पत्थर पर बैठ, बादल करते मनन गहरे
पहाड़ों की गोद में, कली-कली महकी
धरती की गोद में, हवाएँ मुस्कुराती
प्रकृति है वो अद्भुत चित्रकार
हर पल में भरी जीवन की तार