प्रकृति की मुस्कान

हरी-हरी घास पर, चमक रही शबनम
सूरज की किरणें, बिखेर रही मधुर गम

पत्तों में गुनगुनाती, मीठी पवन की सरगम
नदी के किनारे, खिले हुए कमल-दल अनंत

पहाड़ों की गोद में, छुपी हुई शांति अपार
बादलों की चादर में, छिपा आकाश का सौंदर्य अपार

चिड़ियों के कलरव में, जैसे छिपा एक संगीत
प्रकृति की हर सांस में, झलकती अनंत प्रीत