देखकर शहर का हाल मन उदास हो गया
जो शहर कभी ठहरा नहीं था वह शहर है
आज जैसे रुक सा गया है एक कहानी जैसे
जो चलते थे पहिए सरपट सरपट दौड़ते थे
आज वह थम से गए हैं एक महामारी होने से
देख कर शहर का हाल मन उदास हो गया
लगती थी शहर में फल और सब्जियो की मंडी
आज जैसे लुक्स आ गया है शहर मेरा थम गया
कोई देख दरवाजे से ऐसे कोई निकला तो नहीं
आज अजनबी सा बन गया है शहर यादों का
शादियों की भीड़ और मंदिरों की कतारें नहीं है
लगते थे रोड पर जाम वह अब हट चुके हैं कैसे
सुरक्षा का दस्ता आज भी सतर्क है आपके लिए
आज शहर में हॉस्पिटल एक मंदिर हो जैसे दुआएं
और हॉस्पिटल में नर्स और डॉक्टर दुआएं करते है
स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है शहर मेरा अपना भी
सभी ने शपथ उठाई है सब सुरक्षित पृथ्वी बनाने की
अब तो बस खामोशियां और मदहोशियां ठहर जाओ
स्वास्थ्य सेवाएं सक्रिय हो गई सरकारें भी सक्रिय अब
जानकर अनजान ना बनना सबसे बड़ी भूल होगी तुम्हारी
©lawnishtha
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