🔸 🔶 🔹 🔷 "पतंग" 🔷 🔹 🔶 🔸
आसान नहीं है ये ज़िन्दगी का सफ़र,
यह सिखाती है जीने के अद्भुत ढंग।
आसमान में उड़ने वाला महज़ एक,
काग़ज़ का टुकड़ा तो नहीं है पतंग।
छूना चाहते हो बुलंदियाँ आकाश की,
तो जगाओ दिल में इक अद्भुत उमंग।
दृढ़ निश्चय कर उड़ो उन्मुक्त गगन में,
सारा आकाश तुम्हारा बतलाती पतंग।
अपनी डोर को तू बंधन न मानना प्यारे,
नियंत्रित रहेगा जब तक है यह तेरे संग।
तू चाहे आजादी, पर मुझे न कटने देना,
अपनी डोर से गुज़ारिश करती है पतंग।
जिस तरह जीवन में बाधाएं कम नहीं हैं,
आकाश में भी होगा पतंगों का घेरा तंग।
रहना तू मस्ती में, मग़र ज़रा संभल कर,
न होना कभी विचलित समझाती पतंग।
पहुँचेगा ऊँचाई पर तो लोग डराएंगे तुझे,
विरोध, घृणा से समझ उनके असल रंग।
मग़र तू फ़िक्र न करना, बस उड़ते रहना,
उत्साह से मन का विश्वास बढ़ाती पतंग।
तुझे झुकाने व गिराने के प्रयास बहुत होंगे,
मग़र न डरना, हौंसला सदैव रखना बुलंद।
बहती हवाएं हर क़दम तेरा स्वागत करेंगी,
नस-नस में अथाह जुनून जगाती है पतंग।
ग़र गिर जाए कभी, तो उठ दूने उत्साह से,
बुलाए आसमां, पुनः उड़ नए प्रयासों संग।
चल प्यारे बुलंदियों को ख़ुद है तेरा इंतज़ार,
'मैडी' हिम्मत कभी न हारना सिखाती पतंग।
✍️महेश कुमार 'मैडी'✍️
©mkmaddy
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