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पुराने यार

यादों का किस्सा खोलू तो कुछ धुंधलाते चेहरे नजर आते है
गुजरे हुए पल की सोचु तो कुछ दोस्त याद बहुत आते है
अब ना जाने कौनसी नगरी मे है, बडी मुद्दत हुई है उनसे मिले हुए
कुछ बात थी उनमे फूलो सी , कुछ जायका खुशबू जैसा था
गमों मे भी मुस्कान छा जाती है जब भी उनकी याद आ जाती है
सबकी जिदंगी बदल गयी है , एक नये सिरे से ढल गयी है
किसी को नौकरी से फुरसत नही तो किसी को दोस्तो की जरुरत नही
कोई पढ़ने मे डुबा है ,तो किसी को महबूबाओ से ही फुरसत नही
सारे यार गुम हो गये , तु से तुम हो गये
गुजरे हुए पल की सोचु तो कुछ दोस्त याद
आते है
किनारे पर समुन्दर के खजाने नही आते वापस वो पुराने यार नजर नही आते
माना करीब नही है वो ,मगर जिद्दी बहुत है यादों की पुस्तक से बाहर नही जाते ..
वो पुराने यार नजर नही आते..
©kamalsingh