धूल भरी एल्बम में, मुस्कुराते चेहरे
समय के पन्नों पर, जैसे बिखरे नग़मे
कभी की मुलाकातें, अब बस याद रही
हर फोटो में छुपी एक अधूरी कहानी
चीख़ रही हैं आँखें, मौन मुद्राओं में
बीते हुए पल अब, सिर्फ़ सपने कहलाते
धूल भरी एल्बम में, मुस्कुराते चेहरे
समय के पन्नों पर, जैसे बिखरे नग़मे
कभी की मुलाकातें, अब बस याद रही
हर फोटो में छुपी एक अधूरी कहानी
चीख़ रही हैं आँखें, मौन मुद्राओं में
बीते हुए पल अब, सिर्फ़ सपने कहलाते