पुरानी तस्वीरें, बंद अल्बम में सोई,
खोलते ही जैसे कहानियां बोली।
स्याही फीकी, पर यादें ताज़ी,
वो खिलखिलाते चेहरे, बिना किसी साज़ी।
गलियों में खेलते, नंगे पांव,
वो बारिशों में भीगना, जैसे कोई दाव।
फीकी पड़ी स्याही में छुपी,
वो खुशियां, वो हँसी, जिंदगी की रुश्वई।
एक मिठास घुल जाती है लबों पर,
कुछ पुरानी तस्वीरें देख, आँसू बहते नब्ज़ों पर।
समय के साथ, बदल गए हम,
पर यादें वही, स्थिर, जैसे कोई मरहम।
पुरानी तस्वीरों में, बसता है एक जादू,
ले जाते हैं वो हमें, उस सुनहरे अतीत की ओर आज भी।