रंग फीके, पर भावनाएं ताज़ा, बेहद साफ़,
वो पल कहाँ गए, जो थे कभी हमारे साथ।
हर तस्वीर एक कहानी, एक दास्तान,
बचपन की वो नादानी, वो पहली मुस्कान।
कैसे भूलूँ वो दिन, जब खुशियाँ थी अपार,
तस्वीरों में समेटे हैं उन लम्हों के खुमार।
पुराने दोस्त, बिछड़े साथी, सब यहीं कहीं बसे,
तस्वीरें देख आँखे नम, दिल भर आए, हंसे।
वो पुरानी तस्वीरें, जैसे जादू का पिटारा,
खोलते ही बिखर जाते हैं रंग हज़ारा।
आज भी जब तन्हाई में उन्हें निहारता हूँ,
पुरानी तस्वीरों में मैं खुद को दोबारा पाता हूँ।