पूरी तुम
उस दिन जब तेरी ओर मुड़ी ,तो आँखें चौंधिया गई मेरी
सूरज की किरण तिरे बालों से होके गुजरी थी।
और जब पुकारा तूने मेरा नाम
तो मिरे कानों को नौम छू गई।
जब तिरे हाथों ने छुआ मेरा सर
मिरे क़ल्ब में सुकून की बूंद गिर गई।
जब तिरा सीना मिला मिरे सीने से
मैंने माना जन्नत की हस्ती को।
जब मिरे हाथों ने छुए तिरे पैर
मेरी बेघर उंगलियां मकान- दार हो गई।
जब तिरे होंठ मिले मिरे गाल से
मुझ पर वज्द तारी हो गया।
प्यार तो था मुझे बहुत पहले से तुमसे
उस दिन की मुलाकात तो सिर्फ बहाना है।
तिरे बाल, तिरे गाल, तिरा दिल
तिरी बात,तिरे हाथ, तिरे पाँव
मुझे सबसे प्यार है।
मुझे पूरी तुमसे प्यार है।।
- जयश्री
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