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प्यार

फलों के बाग में हो चाहे जो भी फल खुब खाना चाहिये,
हो इश्क या मोहब्बत दिलोजान से भरपूर होन चाहिये !
फूलों के बाग में खुश्बूओं से रोम-रोम महकाना चाहिये,
हो प्यार या इबादत दालोजान से भरपूर होना चाहिये !!
-- संदीप कुमार "संजन"
©sanjan