लोग कहते हैं,"प्यार रुलाती है।"
मैं कहता हूं,"यह रूलाती नही सबक सिखाती है!"
आखिर किसे??
"जो मासुमों के जिस्म को प्यार समझकर लूटते हैं,
जो कुकर्म कर के भी नहीं शर्मींदा होते हैं,
जो प्यार को धन्धा समझकर देह (तन)लंगा करते हैं,
वैसे पशु-अधर्मी को प्यार सबक सिखाते हैं !"
©skmahto
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