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प्यास लिखी है,,,,

मेरी तक़दीर में भी क्या गज़ब की प्यास लिखी है।
अगर दो घूंट मांगू तो समन्दर सूख जाते हैं।।
जख्म गहरा मिले दिल को तमन्ना मुद्दतों से है।
कातिल पास तो आते हैं खंजर चूक जाते हैं।।
वे वफा को सैकड़ों खत खून से लिखे।
लिफाफा देखते ही सब कबूतर रूट जाते हैं।।
खुदा उन कश्तियों को भी मिला देता है साहिल से।
कभी तूफान में जिनके लंगर छूट जाते हैं।।
कभी आंधी भी खुद की ओकाद जान लेती है।
दिए जलते रहते हैं की सजर टूट जाते हैं।।
©keshavray